119. घमंड का अँधेरा

घमंड के अंदर बुरी बात यही होती है
वो कभी महसूस नहीं होने देता कि तुम गलत हो

अहंकार चुपके से मन में घर कर जाता है
सच को भी अपने रंग में ढलने को कहता है

जो झुकना जानता है वही ऊँचा उठता है
घमंड का पौधा अक्सर खुद ही सूखता है

अहंकार में डूबा दिल सच नहीं सुन पाता
अपने ही शब्दों का भार सह नहीं पाता

गलती हर इंसान से कभी न कभी होती है
मगर घमंड में छिपकर आँखें बंद रहती हैं

सच की आवाज़ को सुनना बड़ा कठिन होता है
अहंकार का साया बड़ा घना घिरा होता है

जो अपने को सही समझता है, वही हार जाता है
समय के आगे आखिर सब कुछ झुक जाता है

नम्रता ही जीवन की असली पहचान है
सादगी में छिपा सबसे बड़ा सम्मान है

घमंड के अँधेरे में खुशियाँ खो जाती हैं
सच की राहें ही दिल तक लौट आती हैं

118. सोने के हिरण नहीं होते

चौदह वर्ष वनवास सहा, एक उम्र कटी रोते-रोते
तब जाकर बात समझ आई, सोने के हिरण नहीं होते

सपनों के पीछे भागना भी कभी अंधा रास्ता है
हर चमकती चीज़ में अक्सर झूठा सा अहसास है

माया के जाल बड़े ही चुपके से फैलते हैं
मन के सच्चे मोती धीरे-धीरे ही मिलते हैं

जो दिखता है सोना, वह सच में सोना नहीं होता
हर चमकता चेहरा अपने भीतर रोना नहीं होता

आशाओं के जंगल में भ्रम भी पनप जाते हैं
स्वार्थ के पंछी भी मीठे गीत सुनाते हैं

धैर्य ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है
सच का दीपक ही सबसे उजला तारा है

दुनिया के रंगों में खुद को मत खो देना
झूठी दौलत की नींद में सपनों को मत सोना

कठिन तपस्या ही मन का सोना बनाती है
सादगी की राह ही असली मंज़िल पाती है

समय सिखाता है सबक धीरे-धीरे
सोने के हिरण नहीं होते, समझ लो दिल के घेरे

117. काँटों और महलों का सच

काँटों में रहकर भी फूल सुखी है
     महलों में रहकर भी इंसान दुखी है

फूलों ने दर्द को चुपचाप सहना सीख लिया
     अपनी खुशबू को हर हाल में कहना सीख लिया

काँटे भी अपनी जगह पर मुस्कुराते हैं
     चुपचाप रहकर अपना धर्म निभाते हैं

महलों की चमक में भी मन उदास होता है
     अक्सर वहाँ भी कोई सपना अधूरा होता है

सादगी की मिट्टी में सुकून बसता है
     सच्चा दिल ही जीवन का सच समझता है

दौलत कभी खुशी की गारंटी नहीं होती
     झूठी शोहरत भी दिल की दवा नहीं होती

छोटे घरों में भी प्यार खिल जाता है
     रिश्तों का दीपक हर दर्द पी जाता है

काँटों की गोद में भी फूल महकते हैं
     सच्चे लोग हर हाल में खुश रहते हैं

महलों में रहने वाला भी तरस जाता है
     जब अपना ही साया उससे दूर चला जाता है

116. अपना सा सुकून


मैं उस भीड़ से दूर रहता हूँ
जहाँ लोग अपना होने का नाटक करते हैं

मैं खामोश गलियों को चुन लेता हूँ
जहाँ सच के दीपक अक्सर जलते हैं

झूठी मुस्कानों का शोर मुझे अच्छा नहीं लगता
दिल के सौदागरों का दौर मुझे अच्छा नहीं लगता

मैं सादगी के पंखों पर उड़ना चाहता हूँ
अपने सपनों का आकाश खुद गढ़ना चाहता हूँ

जहाँ अपनापन सिर्फ शब्दों में नहीं हो
जहाँ रिश्ते केवल स्वार्थ की गर्द में नहीं हो

मैं उन चेहरों को पढ़ना सीख गया हूँ
जो हँसकर भी दर्द छुपाना सीख गया हूँ

भीड़ में भी अपनी पहचान रखता हूँ
अकेलेपन में भी मुस्कान रखता हूँ

सच्चे दिलों का साथ ही मेरी दुनिया है
सादगी भरा एहसास ही मेरी बुनियाद है

मैं उस भीड़ से दूर, अपने मन के पास हूँ
सच्चाई के साथ हूँ, और खुशियों का एहसास हूँ

115. तेरे सामने

तुझसे शिकायत भी क्यूँ, तेरे सामने ही मेरा ये हाल है
तेरी खामोशी भी जैसे दिल के हर सवाल का जवाब है

तेरी नज़रें पढ़ लेती हैं मेरे अनकहे एहसासों को
तू ही तो है जो समझता है मेरे टूटे हुए ख़्वाबों को

मैंने चाहा नहीं कभी कोई और तेरे सिवा
मेरी हर दुआ में बस तेरा ही नाम लिखा

तेरी हँसी से रोशन मेरे मन का हर कोना है
तेरे बिना ये दिल जैसे अधूरा सा सपना है

हवा भी छूकर तुझे मेरे पास चली आती है
तेरी खुशबू मेरी साँसों में घर कर जाती है

चाँद भी जैसे तेरी सूरत का दीवाना है
तेरे संग ही मेरा जीवन का अफ़साना है

दूर होकर भी तू मेरे दिल के सबसे पास है
मेरी हर धड़कन में तेरा ही एहसास है

मैं तुझसे प्यार करूँ या खुद को समेटूँ अब
तेरे सामने ही मेरा सारा जहां बसा है रब

तुझसे शिकायत भी क्यूँ, तुझमें ही मेरा प्यार है
तेरे ही नाम से मेरा हर इंतज़ार है

114. असली खुशी

दिखावा करना एक बीमारी है
     जो इंसान की मौलिकता को खत्म कर देती है

सादा जीवन ही सबसे सुंदर कहानी है
     सच्चे मन की अपनी ही पहचान पुरानी है

झूठी चमक में अक्सर दिल घुट जाता है
     अपना सच ही जीवन को आगे बढ़ाता है

मास्क पहनकर खुशियाँ ज्यादा टिकती नहीं
     बनावटी हँसी कभी भी दिल से हँसती नहीं

जो जैसे है उसे वैसे ही अपनाओ
     मन के आँगन में सादगी सजाओ

दौलत से ज्यादा रिश्तों की कीमत जानो
     प्यार के हर मौसम को चुपचाप पहचानो

सूरज भी हर दिन नया उजाला देता है
     सादा जीवन ही सच्चा सहारा देता है

फूलों की खुशबू में अहंकार नहीं होता
     सच्चाई का रास्ता कभी बेकार नहीं होता

खुश रहना है तो मन को हल्का रखना
     सादगी के दीपक को हर पल जलता रखना

असली खुशी भीतर के उजाले में बसती है
     सादगी की दुनिया ही सबसे अच्छी लगती है

113. रंगीन सफ़र

मंज़िल मिट्टी है, पर रास्ता रंगों से भरा है
हर एक पल में जैसे खुशियों का पहरा खड़ा है

     धूप भी हँसती है जब मन में उजाला हो
     आशाओं का हर दीपक सपनों से न्यारा हो

फूलों की खुशबू से दिन अपना सज जाता है
छोटी सी मुस्कान से सारा ग़म उड़ जाता है

     हवा भी गीत गाती है पत्तों की भाषा में
     जीवन झूम उठता है मन की अभिलाषा में

बूँदें जब गिरती हैं धरती का गान बने
बच्चों की हँसी जैसे जीवन की पहचान बने

     उड़ते हुए पंछी भी आकाश लिख जाते हैं
     मेहनत की कहानी हर दिल को समझाते हैं

चलते रहो चुपचाप, कदमों में विश्वास रहे
सूरज की तरह अपना हर सपना पास रहे

     रातें भी कहती हैं सुबह जरूर आएगी
     उम्मीद की चादर हर अंधेरे पर छाएगी

खुशियों का संगीत दिल के अंदर बजता रहे
हर इंसान अपने भीतर उत्सव सा रचता रहे

     मंज़िल मिट्टी है, पर सफ़र सुहाना है
     जीवन तो खुश होकर बस आगे बढ़ जाना है

1. सच्ची धन-संपदा

धनवान वही नहीं जिसके पास खजाने हों
जो दिलों में बस जाएँ वही असली ठिकाने हों
नोटों की गड्डियाँ अक्सर शोर मचाती हैं
लेकिन रिश्तों की खुशबू चुपके से मुस्काती है
    

    तिजोरी भले खाली हो, पर दिल अमीर होना चाहिए
     हर इंसान से प्यार का जज़्बा ज़रूर होना चाहिए
     शनि का भारी साया जब मन पर छा जाए
     मेहनत भी डरकर कहीं पीछे रह जा

दिमाग में मनी का लालच घर ना बनाए
वरना शांति का दीपक धीरे-धीरे बुझ जाए
जीवन में दुश्मनी का बीज जो बोता है
वही इंसान हर पल अंदर से रोता है
    

     रिश्तों की डोर को कभी कमजोर ना करना
     सच्चे साथियों से खुद को दूर ना करना
     अहंकार के रास्ते अक्सर वीरान होते हैं
     जहाँ प्रेम हो, वहीं जीवन आसान होते है

धन आता है और चला भी जाता है
पर अपनापन हमेशा साथ निभाता है
खुशियों का असली घर दिल के अंदर है
प्रेम ही जीवन का सबसे सुंदर मंदिर है
    

     वही धनवान है जो दिल से धनी कहलाए
     जिसके आँगन में रिश्तों का उजाला मुस्काए

112. छोड़ने की कला

यात्रा ने एक बात सिखाई है।
छोड़ना भी एक कला बताई है।

जो साथ नहीं चलता, छोड़ देना।
मन का बोझ थोड़ा मोड़ देना।

रास्ते बदलते रहते हर पल।
समय भी चलता अपने ही कल।

कुछ चीज़ें पीछे रह जाती हैं।
नई राहें आगे बुलाती हैं।

हर मंज़िल सबकी नहीं होती।
हर चाहत पूरी नहीं होती।

जो अपना है, वही साथ रहेगा।
बाकी समय खुद तय करेगा।

छोड़ना भी सीखना पड़ता है।
दिल को थोड़ा रखना पड़ता है।

अनावश्यक भार हटाना है।
आगे बढ़ते जाना है।

यात्रा का यही संदेश है।
जीवन का यही विशेष है।

जो छूटे, उसे जाने दो।
नई खुशियों को आने दो।

111. रिश्ते

कुछ रिश्ते जीवन के अनमोल खजाने होते हैं।
ये जीवन के सुंदर और सुहाने होते हैं।
हर धड़कन में एहसास छुपा होता है।
दिल के करीब कोई अपना होता है।

कुछ रिश्ते बिना नाम के ही बन जाते हैं।
सूखे पेड़ पर जैसे फूल खिल जाते हैं।
कभी दोस्ती, कभी प्रेम का रूप लेते हैं।
जीवन का अर्थ भी धीरे दे देते हैं।

संग उनके हर दर्द हल्का लगने लगता है।
बंजर मन में भी फूल खिलने लगता है।
खुशियों के रंग जीवन में भर जाते हैं।
कुछ रिश्ते जन्नत सा सुख दे जाते हैं।

सच्चे भावों की खुशबू साथ रहती है।
दिल की धड़कन भी कुछ कहती है।
अपनापन धीरे से घर करता है।
मन भी शांति का वर करता है।

कुछ रिश्ते यादों में बस जाते हैं।
जीवन का संगीत बन जाते हैं।
यही रिश्तों का सच्चा सार है।
रिश्तों में ही जीवन का प्यार है।

110. अंत का सच

क्यों गुरुर चार दिन के ठाठ पर।
मुट्ठी खाली घाट की राह पर।

दुनिया का खेल भी खत्म होगा।
अंत में सब पीछे छूटेगा।

धन भी यहीं रह जाएगा।
मान भी यहीं सो जाएगा।

शोहरत की चमक मिट जाएगी।
सिर्फ यादें संग रह जाएँगी।

घमंड का बोझ कभी मत लेना।
सादगी को दिल में ही रखना।

समय से बड़ा कोई नहीं।
सच से बड़ा कोई नहीं।

आज मुस्कान सबको देना।
दर्द में भी हाथ बढ़ाना।

दिल किसी का मत दुखाना।
इंसानियत को साथ निभाना।

जीवन एक क्षण का मेला है।
हर इंसान यहाँ अकेला है।

अंत में खाली हाथ जाना।
यही जीवन का सच माना।

109. पतझड़ का वादा

हर पतझड़ एक वादा है।
कि बसंत फिर आएगा।
उसी सूखी शाखा पर।
नया फूल खिल जाएगा।

पत्ते झड़ना भी सीखाते हैं।
समय बदलना भी बताते हैं।
जो टूटता है, वही बनता है।
संघर्ष से जीवन सजता है।

धैर्य रखो, मौसम बदलेगा।
अंधेरा भी एक दिन ढलेगा।
हवा नए गीत सुनाएगी।
धरती फिर मुस्कुराएगी।

हर खालीपन भर जाएगा।
हर दर्द भी मिट जाएगा।
उम्मीद का दीप जलाए रखना।
दिल में विश्वास बनाए रखना।

पतझड़ भी एक संदेश देता है।
नया जन्म हमेशा लेता है।
संघर्ष ही पहचान बनाएगा।
बसंत फिर लौटकर आएगा।

108. अपनी क़ीमत पहचानो

जीवन में उसे प्राथमिकता मत दो।
जो तुम्हें सिर्फ विकल्प समझता हो।
जो तुम्हें वक्त मिले तभी याद करे।
और अपने मतलब से ही बात करे।

     दिल की जगह शर्तें रखे जो।
     प्यार में भी गणित करे जो।
     ऐसे रिश्तों से दूरी रखो।
     अपने सम्मान को आगे रखो।

जो सच में अपना होगा।
वो हर हाल में साथ होगा।
मुश्किल में हाथ बढ़ाएगा।
और दिल से रिश्ता निभाएगा।

     खुद को कभी कम मत समझो।
     दूसरों के लिए मत बदलो।
     अपनी पहचान बनाए रखना।
     सच की राह अपनाए रखना।

विकल्प बनना भी अपमान है।
स्वाभिमान ही सबसे महान है।
जो तुम्हें चुनता है दिल से।
वही रहेगा जीवन की मंज़िल से।

107. नेता जी का खेल


एक कामयाब नेता वही कहलाए।
जो अपने बच्चों को विदेश पहुँचाए।
दूसरों के बच्चों को मैदान में लगाए।
धार्मिक जुलूसों में उन्हें घुमाए।

घर के बच्चों को डॉलर कमाने भेजे।
और जनता को देशभक्ति के बीज दे।
बाहर पढ़ाई, अंदर लड़ाई चलती है।
कुर्सी की दुनिया बड़ी रंगीली लगती है।

भाषण में सेवा का राग सुनाए।
पीछे से अपना काम बनाए।
वोट के मौसम में मुस्कान बिखेरे।
बाद में अपने वादे ही घेरे।

सड़क भी बने, पर फोटो भी हो।
घोषणा भी हो, पर नोट भी हो।
समस्याएँ धीरे चलती जाएँ।
फाइलें कुर्सी पर ही सो जाएँ।

जनता हँसे या रोती रहे।
नेताजी की गाड़ी दौड़ती रहे।
यह भी राजनीति का मज़ाक है।
लोकतंत्र में थोड़ा सा नाटक है।

106. समझदारी का रास्ता


होशियार होना अच्छी बात है।
पर घमंड करना गलत बात है।
दूसरों को मूर्ख समझना भूल है।
यही जीवन का असली मूल है।

ज्ञान बढ़े तो विनम्र बनो।
अहंकार को मन से कम करो।
अपनी समझ पर गर्व करो।
पर सबका सम्मान भी करो।

हर इंसान अलग सोच रखता है।
हर दिल अपना सच कहता है।
सबको एक जैसा मत मानो।
समझदारी का अर्थ पहचानो।

जो ज्यादा जानता है, चुप रहता है।
जो सच्चा है, धैर्य से रहता है।
दूसरों को नीचा दिखाना नहीं।
इंसानियत को मिटाना नहीं।

होशियार बनो, मगर सरल रहो।
दिल में सच्चाई लेकर चलो।
यही सबसे बड़ी समझदारी है।
यही जीवन की जिम्मेदारी है।

105. गद्दार की पहचान

जब दुश्मन हर राज़ से बाक़िफ़ हो।
तो समझ लेना दोस्त ग़द्दार है।
     मीठी बातों के पीछे जहर छुपा।
     ऐसा भी कोई किरदार है।
हर मुस्कान सच्ची नहीं होती।
हर चमक सोने जैसी नहीं होती।
     कभी नज़दीकी भी धोखा देती है।
     अंदर ही अंदर चोट देती है।
जो ज्यादा अपना बनने लगे।
वही अक्सर दूर जाने लगे।
     राज़ अपने सब मत खोलो।
     समझदारी की चाबी तोलो।
हर साथी साथ निभाता नहीं।
हर रिश्ता दिल से जाता नहीं।
     समय पर सच खुद दिख जाएगा।
     भेद भी धीरे खुल जाएगा।
विश्वास बहुत अनमोल है।
पर परखना भी बड़ा बोल है।
     जो सच्चा है वही रहेगा।
     झूठ का पर्दा गिर ही जाएगा।
सच की राह कठिन जरूर है।
पर यही जीवन का नूर है।

104. ऊँचाई का सच

हर ऊँचाई को गिरने का डर होता है।
हर सफलता के पीछे संघर्ष खड़ा होता है।

जो ऊपर जाता है, संभलना भी सीखता है।
समय के साथ चलना भी सीखता है।

ऊँचाई पर अहंकार नहीं होना चाहिए।
मन में अंधकार नहीं होना चाहिए।

हौसले को हमेशा साथ रखना है।
सादगी को दिल में बाँध रखना है।

शिखर भी एक दिन थक जाता है।
मजबूत वही जो टिक जाता है।

सपनों को उड़ान देना है।
पर जड़ों को भी पहचानना है।

हर जीत परीक्षा लेकर आती है।
नई चुनौती भी साथ लाती है।

डर को मन से दूर भगाओ।
आगे बढ़ते कदम बढ़ाओ।

ऊँचाई वही जो संतुलन सिखाए।
जीवन को सच्चा अर्थ बताए।

संघर्ष ही पहचान बनाता है।
यही सफलता का गीत गाता है।

103. जीवन का पाठ

ये हकीकत है, बंधु सुन लो।
किताबों से सीखो तो नींद आती है।
ज़िंदगी अगर खुद सिखाने लगे।
तो रातें भी अक्सर जाग जाती हैं।

पन्नों पर लिखा सब आसान लगे।
सच का सफर थोड़ा कठिन लगे।
शब्दों में ज्ञान सिमट जाता है।
अनुभव मन को झकझोर जाता है।

कहानी पढ़कर मुस्कान आती है।
पर संघर्ष की आँच रुलाती है।
किताबें राह दिखा सकती हैं।
पर ज़िंदगी भी सब सिखा सकती है।

सपनों की कीमत समझाती है।
अपनों की असलियत दिखाती है।
सफलता का मतलब बताती है।
और हार से उठना सिखाती है।

ये जीवन का गहरा ज्ञान है।
अनुभव ही असली विज्ञान है।
किताबें साथी बन सकती हैं।
पर ज़िंदगी ही गुरु महान है।

102. अति का अंत

अति के बाद क्षति निश्चित है।
     चाहे तुम कितने भी दिग्गज हो।
शक्ति का अहंकार मिट जाता है।
     समय का चक्र भी घूम जाता है।
हर चीज़ की सीमा होती है।
     जीवन में भी रीति होती है।
जो सीमा पार कर जाता है।
     वो अंत में पछताता है।
अधिक बोलना भी भारी होता है।
     अधिक सोचना भी दुख देता है।
अति विश्वास भी चोट करता है।
     अति मोह भी मन तोड़ता है।
संतुलन ही जीवन की कुंजी है।
     यही सबसे बड़ी पूंजी है।
धीरे चलना भी समझदारी है।
     शांति में ही खुशहाली है।
अति का रास्ता अंधेरा लाता है।
     संयम ही आगे बढ़ाता है।
यही जीवन का सच्चा सार है।
     मध्यम मार्ग ही स्वीकार है।

101. आईने का सच

आईना जब भी उठाया करो।
पहले खुद को देखा करो।
फिर दुनिया को दिखाया करो।

     सच का दीप जलाया करो।
     चेहरे से ज्यादा मन पढ़ना।
     अंदर की आवाज़ भी सुनना।

झूठी हँसी को दूर रखना।
सादगी को साथ रखना।
आईना सिर्फ रूप नहीं दिखाता।

     भीतर का हाल भी बताता।
     दिल साफ़ हो तो चमक आए।
     सच की खुशबू भी फैल जाए।

दूसरों में दोष ढूँढना छोड़ो।
अपने अंदर भी झाँक के देखो।
हर खामी को सुधारते जाओ।

     जीवन को सुंदर बनाते जाओ।
     जो जैसा है, वैसा स्वीकारो।
     अहंकार का बोझ उतारो।

आईना जब सच दिखाएगा।
मन भी हल्का हो जाएगा।